Friday, June 12, 2020

ग़ज़ल

ग़ज़ल 
बहर - फाइलुन फाइलुन फाइलुन 

फिर लबों पे हँसी आ गई 
ज़ेह्न में ताज़गी आ गई 

तुम जो आये तो ऐसा लगा
सामने ज़िंदगी आ गई 

भागने लग गई तीरगी 
पास जब रौशनी आ गई 

 जब तसव्वुर में तुम आ गये
ख़ुद ब ख़ुद शायरी आ गई 

देखने  के लिए तुम को ही
छत पे कल चाँदनी आ गई

आश् ना जब हुए तुमसे हम 
हमसे मिलने खुशी  आ गई 

शायर -जितेंद्र सुकुमार साहिर