ग़ज़ल
बहर - फाइलुन फाइलुन फाइलुन
फिर लबों पे हँसी आ गई
ज़ेह्न में ताज़गी आ गई
तुम जो आये तो ऐसा लगा
सामने ज़िंदगी आ गई
भागने लग गई तीरगी
पास जब रौशनी आ गई
जब तसव्वुर में तुम आ गये
ख़ुद ब ख़ुद शायरी आ गई
देखने के लिए तुम को ही
छत पे कल चाँदनी आ गई
आश् ना जब हुए तुमसे हम
हमसे मिलने खुशी आ गई
शायर -जितेंद्र सुकुमार साहिर