Monday, November 8, 2021
Sunday, November 7, 2021
ग़ज़ल
ग़जल
तुम किस मिट्टी के बने हो
हर इक मौसम में अड़े हो
हॅंस के दो बातें कर लो
इक मुद्दत बाद मिले हो
ज़इफो सा हाल है तेरा
घर के कोने में पड़े हो
दर दर की ठोकर खा रहे
लगता है तुम भी भले हो
तुम भी इतिहास रचोगे
बस खाली हाथ चले हो
हर सच को झूठ कहोगे
अच्छा कानून पढ़े हो
जुल्फ़े बिखरी है तुम्हारी
क्या आईने से डरे हो
हर कोई थूॅं करता है
सच में तुम इतने बुरे हो
Subscribe to:
Comments (Atom)