Sunday, November 7, 2021

ग़ज़ल

ग़ज़ल

ग़जल

तुम किस मिट्टी के बने हो
हर इक मौसम में अड़े हो

हॅंस के दो बातें कर लो
इक मुद्दत बाद मिले हो

ज़इफो सा हाल है तेरा
घर के कोने में पड़े हो

दर दर की ठोकर खा रहे
लगता है तुम भी भले हो

तुम भी इतिहास रचोगे
बस खाली हाथ चले हो

हर सच को झूठ कहोगे
अच्छा कानून पढ़े हो

जुल्फ़े बिखरी है तुम्हारी
क्या आईने से डरे हो

हर कोई थूॅं करता है
सच में तुम इतने बुरे हो
शायर- जितेन्द्र सुकुमार साहिर