Wednesday, September 20, 2023

मर गया यूॅं ही

कायल हूॅं

बदगुमा रात

हिन्दी दिवस

मन को

बरसात हुई

एन एस एस

रात लिखना

फिर वही..

बुला लिया मैंने

मोदी जी

Thursday, May 18, 2023

ग़ज़ल

दोस्तों से मैं अगर अनजान होता
तो यक़ीनन ही बहुत नुकसान होता

थक गया हूॅं मैं अकेले चलते चलते
साथ तुम होते सफ़र आसान होता

जीने देती है समझदारी कहाॅं अब
काश! दिल ये मेरा भी नादान होता

छोड़कर तुमने मुझे अच्छा किया है
वरना छल, धोखें से मैं अनजान होता

दे दिया कर लौटने की यूॅं ख़बर भी 
घर में पाकर मैं तुम्हें,हैरान होता

आदमीयत ज़िंदा है लोगों में वरना 
हर जगह पे भेड़िया, हैवान होता

छोड़ मैदां भागता तमराज किलविश
सच में साहिर मैं जो शक्तिमान होता

शायर जितेन्द्र सुकुमार साहिर 

gazal