दोस्तों से मैं अगर अनजान होता
तो यक़ीनन ही बहुत नुकसान होता
थक गया हूॅं मैं अकेले चलते चलते
साथ तुम होते सफ़र आसान होता
जीने देती है समझदारी कहाॅं अब
काश! दिल ये मेरा भी नादान होता
छोड़कर तुमने मुझे अच्छा किया है
वरना छल, धोखें से मैं अनजान होता
दे दिया कर लौटने की यूॅं ख़बर भी
घर में पाकर मैं तुम्हें,हैरान होता
आदमीयत ज़िंदा है लोगों में वरना
हर जगह पे भेड़िया, हैवान होता
छोड़ मैदां भागता तमराज किलविश
सच में साहिर मैं जो शक्तिमान होता
शायर जितेन्द्र सुकुमार साहिर
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