Tuesday, May 30, 2023
Thursday, May 18, 2023
ग़ज़ल
दोस्तों से मैं अगर अनजान होता
तो यक़ीनन ही बहुत नुकसान होता
थक गया हूॅं मैं अकेले चलते चलते
साथ तुम होते सफ़र आसान होता
जीने देती है समझदारी कहाॅं अब
काश! दिल ये मेरा भी नादान होता
छोड़कर तुमने मुझे अच्छा किया है
वरना छल, धोखें से मैं अनजान होता
दे दिया कर लौटने की यूॅं ख़बर भी
घर में पाकर मैं तुम्हें,हैरान होता
आदमीयत ज़िंदा है लोगों में वरना
हर जगह पे भेड़िया, हैवान होता
छोड़ मैदां भागता तमराज किलविश
सच में साहिर मैं जो शक्तिमान होता
शायर जितेन्द्र सुकुमार साहिर
Monday, May 15, 2023
Sunday, May 14, 2023
Thursday, May 11, 2023
Tuesday, May 2, 2023
Subscribe to:
Comments (Atom)