🌹ग़ज़ल🌹
ग़म न हो गर ज़िंदगी में
क्या मज़ा है फिर खुशी में
तेरा ही दिखता है चेहरा
शाख़े गुल की हर कली में
तजरूबातें ज़िंदगी का
अक्स देखे शायरी में
तीरगी से क्या शिक़ायत
हम तो भटके रोशनी में
ढूंढते फिरता हूं हर सू
आदमीयत आदमी में
हो गया बदनाम साहिर
बेवफ़ा की आशिक़ी में
अक्स- साया, परछाई
शाखे गुल- फूल की टहनी
तजरूबातें ज़िंदगी - ज़िंदगी का अनुभव
जितेंद्र सुकुमार 'साहिर '
शायर
'उदय आशियाना 'चौबेबांध (राजिम) पोस्ट बरोंडा जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़ )493885
व्हाट्सएप नंबर 90091 87981
9827345298
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