ग़ज़ल
मिलाकर नज़र से नज़र देख लेते।
जो होता है दिल पे असर देख लेते।।
न तुम पूछते हाल मुझसे जहाँ का
अगर आज की तुम ख़बर देख लेते।।
तरसता हूँ मैं तेरी ही इक नज़र को
कभी तो पलट कर इधर देख लेते।।
कभी भूखा रह के कभी पी के पानी
किया कैसा हमने बसर देख लेते।
मजा़ गर नसीमों का लेना है साहिर
निकलकर घरों से सहर देख लेते।।
✍जितेंद्र सुकुमार 'साहिर '
शायर
'उदय आशियाना 'चौबेबांधा (राजिम)
पोस्ट बरोंडा जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़ )493885
व्हाट्सएप नंबर 90091 87981
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