*गज़ल*
आँख में रतजगा सा लगता है ।
इश्क़ में दिल पड़ा सा लगता है ।।
मन में तुझको बसा लिया मैंने ।
तेरा चेहरा खुदा सा लगता है ।।
उसके पीछे पड़ी है ये दुनिया,
आदमी वो भला सा लगता है ।
झूठ का दबदबा है चारो तरफ़,
सच यहाँ लापता सा लगता है ।
दर्द है उसकी शायरी में बहुत,
वो कोई दिल जला सा लगता है।
छेड़ देता है ये मुझे साहिर
क्यो ये ग़म मनचला सा लगता है
✍जितेंद्र सुकुमार 'साहिर '
शायर
'उदय आशियाना 'चौबेबांधा (राजिम)
पोस्ट बरोंडा जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़ )493885
व्हाट्सएप नंबर 90091 87981
9827345298
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