Sunday, April 19, 2020

ग़ज़ल

*गज़ल* 

आँख में रतजगा सा लगता है ।
इश्क़ में दिल पड़ा सा लगता है ।।

मन में तुझको बसा लिया मैंने ।
तेरा चेहरा खुदा सा लगता है ।।

उसके पीछे पड़ी है  ये दुनिया,
आदमी वो भला सा लगता है ।

झूठ का दबदबा है चारो तरफ़,
सच यहाँ लापता सा लगता है ।

दर्द है उसकी शायरी में बहुत, 
वो कोई दिल जला सा लगता है।

छेड़ देता है ये मुझे साहिर 
क्यो ये ग़म मनचला सा लगता है

✍जितेंद्र सुकुमार  'साहिर '
       शायर
 'उदय आशियाना 'चौबेबांधा (राजिम) 
पोस्ट बरोंडा जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़ )493885
व्हाट्सएप नंबर 90091 87981
9827345298

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