Wednesday, September 23, 2020

ग़ज़ल

ग़ज़ल

मौत  ताँडव   मचा   रही  है  अभी
सब की दहशत में  ज़िंदगी है अभी

एक   मुद्दत   से  हूँ   असीरे   ग़म
क़ैद  जाने   कहाँ   ख़ुशी  है  अभी

मेरी  तफ़्तीश  में   तो सब  कुछ है
जाने किस चीज़ की कमी है अभी

शह्र वाक़िफ़ है उस की अज़्मत से
जिस के हाथों में हथकड़ी है अभी

गाँव    वाले     भले     तरसते   हैं
शह्र  में   बाक़ी   रौशनी   है  अभी

गाँव   क़स्बे   की   छोड़िये  साहब
पूरी  दुनिया  में  खलबली  है अभी

कल तलक ख़ौफ़  नाक लगता था
जिस  के चेहरे  पे सादगी  है अभी

वक़्त  नाजुक है  आ भी  जाओ तुम
साँस रूकरूक के चल रही है अभी

ख़ुद  ही उलझन  में हैं  घिरे  साहिर
दूसरों   की   किसे   पड़ी   है  अभी

✍जितेंद्र सुकुमार  'साहिर '
       शायर
 *एकांत विला*  पदमा तालाब के सामने
 थाना पारा राजिम
पोस्ट  राजिम, जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़ )493885
व्हाट्सएप नंबर 90091 87981
9827345298

Saturday, September 5, 2020

ग़ज़ल

ग़ज़ल

अपना ग़म भी छुपाना पड़ता है 
बेवजह मुस्कुराना पड़ता है

जीस्त जैसी भी हो मगर हँस के
बोझ इसका उठाना पड़ता है

रिश्ता दिल का यूँ ही नहीं जुड़ता
मिलने  भी आना जाना पड़ता है

पेट बातों से ही नहीं भरता
दो निवाला खिलाना पड़ता है

आज का दौर है अलग सबसे
कौन क्या है बताना पड़ता है

दोस्ती का उसूल है साहिर
वादा करके निभाना पड़ता है

✍जितेंद्र सुकुमार  'साहिर '
       शायर
 *एकांत विला*  पदमा तालाब के सामने
 थाना पारा- राजिम
पोस्ट - राजिम, जिला -गरियाबंद (छत्तीसगढ़ )493885
व्हाट्सएप नंबर 90091 87981
9827345298