ग़ज़ल
मौत ताँडव मचा रही है अभी
सब की दहशत में ज़िंदगी है अभी
एक मुद्दत से हूँ असीरे ग़म
क़ैद जाने कहाँ ख़ुशी है अभी
मेरी तफ़्तीश में तो सब कुछ है
जाने किस चीज़ की कमी है अभी
शह्र वाक़िफ़ है उस की अज़्मत से
जिस के हाथों में हथकड़ी है अभी
गाँव वाले भले तरसते हैं
शह्र में बाक़ी रौशनी है अभी
गाँव क़स्बे की छोड़िये साहब
पूरी दुनिया में खलबली है अभी
कल तलक ख़ौफ़ नाक लगता था
जिस के चेहरे पे सादगी है अभी
वक़्त नाजुक है आ भी जाओ तुम
साँस रूकरूक के चल रही है अभी
ख़ुद ही उलझन में हैं घिरे साहिर
दूसरों की किसे पड़ी है अभी
✍जितेंद्र सुकुमार 'साहिर '
शायर
*एकांत विला* पदमा तालाब के सामने
थाना पारा राजिम
पोस्ट राजिम, जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़ )493885
व्हाट्सएप नंबर 90091 87981
9827345298
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